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Thursday, September 22, 2011

भारतीय लोग दुनिया में सबसे अमीर


भारत में अब कोई गरीब नहीं रहा, ऐसा योजना आयोग का मानना हैं. अब योजना आयोग हैं तो योजना तो बनाएगा ही. क्योंकि उसे तो पता हैं कि भारत में सिर्फ सांसद ही गरीब हैं. जिन्हें दुनिया में सबसे सस्ता और उच्च गुणवत्ता वत्ता वाला भोजन मिलता हैं. दुनिया भर कि मुफ्त सेवाओं का आनंद लेते हैं. हवाई जहाज से यात्रा करते हैं तो बिल नहीं देते. ये बेचारे सांसद इतने गरीब हैं कि इनके उपर भारत के हर सरकारी बिभाग का कुछ ना कुछ तो बकाया हैं, दे ही नहीं पाते बेचारे .


अब सड़क के किनारे मंदिरों के बाहर लाइन लगा करके भीख मांगने वाले लोग अमीरों कि श्रेणी में आ गये हैं. क्योंकि वो एक तो बड़े-बड़े शहरो में रहते हैं और उपर से अपने खाने में प्रतिदिन ३६ रूपये से ज्यादा खर्च भी करते हैं.

सरकार में बैठे कुछ लोग पगला गये हैं. वो एक कहावत हैं कि जब गीदड़ कि मौत आती हैं तो वो शहर कि तरफ भागता हैं ......... अब वोही हो रहा हैं.

Tuesday, September 20, 2011

मोदी और इस्लामिक टोपी.




मोदी को कुछ मुस्लिम धर्म गुरुवो ने इस्लामिक टोपी पहनने को दी , जिसे नरेन्द्र मोदी ने लेने से मना कर दिया. उसकी जगह उन्होंने ने धार्मिक गुरु से शाल लेना उचित समझा.

इससे कौन नाराज हुआ और कौन नहीं . लेकिन खबर जंगल कि आग कि तरह फ़ैल जरुर गई. और अगर मोदी महोदय उस टोपी को ले भी लेते तो कुछ खास प्रतिक्रिया नहीं आती. लोगो कि नजरो में भाई चारा जरुर बढता. लेकिन क्या टोपी ले कर के पहन लेने से दूरियां ख़त्म हो जाएँगी. शायद नहीं.

इसी तरह अगर कोई हिन्दू धर्म गुरु किसी मुस्लिम नेता को गेरुआ वस्त्र या ऐसी कोई भी धार्मिक वस्तु भेंट देता तो क्या होता. किसी को पता हैं ? ..................में बताता हूँ. ............................... कंही ना कंही से फ़तवा जारी हो जाता.

जंहा तक मेरा विचार हैं, कि धार्मिक वस्तुए उसी इन्सान को भेंट दी जानी चाहिए जो उसकी इज्जत कर सके. मुस्लिम टोपी कि जितनी इज्जत एक मुसलमान कर सकता हैं , शायद एक हिन्दू या कोई और नहीं कर सकता. हिन्दू अगर अपनी धार्मिक वस्तु किसी और धर्म को मानने वाले को देगा तो शायद अपमान ही होगा.

मोदी ने टोपी ना लेकर के किसी वर्ग का अपमान होने से बचाया हैं. क्योंकि मोदी उसकी वो इज्जत नहीं कर पाते जो एक मुसलमान लोग कर सकते हैं.