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Wednesday, August 31, 2011

छोटे - छोटे गुनाह कि सजा फांसी क्यों.


हिंदुस्तान में वैसे तो लोग सबूतों के अभाव में बरी हो जाते हैं. लेकिन छोटे से अपराध ( किसी नेता या मंत्री कि हत्या, आतंकवाद फैलाना, या आतंकवादी हमले) में फांसी क्यों.

स्वर्गीय श्री राजीव गाँधी जी के हत्यारे को अब फांसी नहीं होगी. पहले कांग्रेस सरकार बचाती रही, तो अब राज्य सरकार बचाने आ गई हैं. संसद में जब आतंकवादी हमला हुआ तो उसमे कोई मारा ही नहीं गया इसलिए अब अफजल गुरु को भी फांसी नहीं होगी.

स्वर्गीय श्री राजीव गाँधी जी कि छवि एक ईमानदार नेता के साथ -साथ एक ऐसे नेता के रूप में थी , जो भारत को वैश्विक शक्ति कि तरफ ले जाने में सक्षम थे. भारत कि जनता उनका पूरी तरह से सम्मान करती थी. और अपने जीते जी सबके चहेते बने रहे. लेकिन आज उनकी अपनी ही पार्टी के लोग उनको सिर्फ फूल -मालावो तक ही सिमित रख दिया हैं. पूरी कांग्रेस पार्टी चुप-चाप बैठी हैं कि उनका वोट बैंक गड़बड़ा ना जाय. जिसको जाना था वो तो अब जा चूका हैं.

२०० लोगो का हत्यारा कसाब आज मजे से जी रहा हैं, उसे पता हैं कि कश्मीरी अलगावादी नेता उसको एक ना एक दिन छुड़ा ही लेंगे.

तो ऐसे छोटे मोटे गुनाह कि सजा फांसी क्यों . फांसी तो बलात्कारी को होनी चाहिए, छुटभैये चोरो को फांसी होनी चाहिये, फांसी तो दहेज़ हत्या, प्रोपर्टी के विवाद में कि गई हत्या, लुट मर जैसे बड़ी-बड़ी घटनावो के लिए होनी चाहिए.

अब किसी भी बड़े नेता या मंत्री को मारने पे फांसी नहीं मिलेगी.... बल्कि बड़े आतंकवादियों को पुरे ऐशो आराम कि जिन्दगी मिलेगी.

जय हिंद.

Tuesday, August 30, 2011

इतनी हिम्मत कि सांसदों को गाली......

आम आदमी कि हिम्मत अब इतनी बढ़ गई हैं कि वो संसद में बैठे महान सांसदों को भी गाली देने लगे हैं. अरे आदमी को हमेशा अपनी औकात में रहना चाहिए. पैजामे का नाडा पैजामे के अन्दर ही ठीक लगता हैं.

अब किरण बेदी जी हो या ओम पुरी साहेब इनकी समाज में उतनी इज्जत कंहा हैं जितनी कि लालू प्रसाद यादव जैसे सांसदों कि हैं. इतना सारा चारा खा कर के और तारकोल पी कर के भी संसद में जमे हुए हैं और वो सुना हैं कि स्टेंडिंग कमिटी के मेम्बर भी हैं.

मनीष तिवारी जी कितना मीठा बोलते हैं , ये तो पूरा देश जनता हैं, कपिल सिब्बल साहेब का ज्ञान समुद्र कि लहरों कि तरह उछाल मारता हैं ये भी कम महान थोड़े हैं. जंगल का राजा गीदड़ तो खैर आज कल शांत हैं.

चलिए खैर, अब तो किरण बेदी जी को और ओम पुरी जी को संसद कि गरिमा को ठेस पहुचाने के जुर्म में संसद में पेश किया ही जायेगा , लेकिन जनता कि गरिमा भी कुछ होती हैं क्या? ?????????.

मनीष तिवारी जी को और कपिल साहेब को खुले चौराहे पे छोड़ दिया जाय.............ऐसा होना चाहिए आखिर उन्होंने भी तो जनता कि भावनावो का मजाक उडाया हैं.


Sunday, August 21, 2011

कुत्ते का पिल्ला (पप्पी) मर गया. -Taarkeshwar Giri.

कपिल सिब्बल अपनी कार से दरियागंज से चांदनी चौक जा रहे थे , जामा मस्जिद के पास पहुँचते ही एक कुत्ते का पिल्ला ( पप्पी ) उनकी कार के नीचे आ करके मर गया.

कपिल साहेब ने अपने ड्राईवर से बोला कि जावो और इसके मालिक का पता करो.

थोड़ी देर मैं ड्राईवर वापस आया तो उसके गले मैं फूलो कि माला थी, कपिल साहेब ने पूछा ये क्या हुआ, ड्राईवर बोला साहेब लोगो ने पूरी बात सुने बिना मेरे गले मैं फूलो कि माला डाल दी. मैंने तो सिर्फ इतना ही कहा था कि " मैं कपिल सिब्बल का ड्राइवर हूँ " "और कुत्ते का बच्चा मर गया."

Saturday, August 20, 2011

एक चुटकुला अगेंस्ट भ्रस्टाचार - हँसना बिलकुल मना नहीं है.

एक बार कपिल सिब्बल , दिग्विजय सिंह और चिंदम्बरम हेलीकाप्टर से यात्रा कर रहे थे, सिब्बल ने एक सौ रुपये का नोट निकाला और निचे गिरा के बोला : - मैंने एक गरीब भारतीय को खुश किया. दिग्विजय सिंह ने तुरंत पचास -पचास के दो नोट निकाले और तुरंत नीचे गिरा दिया और कहा की मैंने दो गरीब भारतीय की मदद की.

अब भला चिदंबरम साहेब कैसे चुप बैठे , गृह मंत्री जो ठहरे , उन्होंने तुरंत एक -एक रुपये के सौ सिक्के उठाये और तुरंत नीचे गिरा दिया, और बोले की मैंने सौ गरीब भारतीय परिवार को खुश किया.

पायलट इन तीनो की बाते सुन रहा था , वह हंसा और जोर से बोला की, अगर मैं तुम तीनो को नीचे फेंक दू तो एक सौ पचीस करोड़ भारतीय परिवार खुश हो जायंगे.

PILOT WAS ANNA HAZARE

Friday, August 19, 2011

शांति मार्च कि कुछ तस्वीरे







देश का युवा वर्ग सड़क पे आ गया हैं. भ्रस्टाचार कि लड़ाई में मैं खुद सामिल हुआ और अपने दोस्तों के साथ इंडिया गेट से जंतर मंतर तक शांति मार्च का हिस्सा बना.








क्या जवान क्या बजुर्ग. क्या आदमी और क्या महिलाये सब साथ हो लिए.

Sunday, August 14, 2011

दिल्ली पुलिस बताएगी---- कि आन्दोलन कैसे करे...

अंग्रेजो के ज़माने का पुलिसिया ढांचा आखिर कैसे बदल सकता हैं, सरकार तानाशाह जो ठहरी. नागरिक सुरक्षा का नारा देने वाली दिल्ली पुलिस अब नागरिको के मौलिक अधिकारों का दमन करने से भी नहीं चूक रही हैं.

भारत कि केंद्रीय सरकार ईस हद तक भ्रस्टाचार में लिप्त हो चुकी हैं कि उसका बाहर निकलना अब तय होगया हैं. लेकिन खिसियानी बिल्ली खम्बा तो नोचेगी ही. दिल्ली पुलिस ये भूल जाती हैं कि उसका काम जनता कि सेवा करना और उसके अधिकारों का पालन करवाना हैं ना कि नेतावो और मंत्रियों कि चापलूसी करना.

आज दिल्ली में हालत इमेर्जेसी ( इंदिरा गाँधी के ज़माने ) वाली हो गई हैं. कोई भी नागरिक अपना विरोध प्रकट नहीं कर सकता नहीं तो लाठियों से पीटा जायेगा. वजह केंद्र सरकार ज्यादा से ज्यादा समय जनता को उलझाना चाहती हैं ताकि गाँधी परिवार और उनके भ्रष्ट करीबी चमचे अपने काले धन को छुपा सके.

भारत के इतिहास में जितनी विदेश यात्रा श्रीमती सोनिया गाँधी और उनके परिवार के लोगो ने कि हैं , उतनी यात्रा शायद ही कोई भारत का प्रधान मंत्री या विदेश मंत्री ने कि हो.

जिस तरीके से दिल्ली पुलिस ने अन्ना हजारे के सामने अनशन करने कि शर्त रखी हैं उसे तो येही लगता हैं कि अन्ना हजारे को भ्रस्टाचार के विरोध में अनशन नहीं बल्कि तीन दिन तक रोजा रखने कि सलाह दी गई हो. आज दिल्ली के अन्दर दिल्ली पुलिस ही सर्वोच्च अधिकार रखने वाली संस्था बन गई हैं. दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार सब दिल्ली पुलिस के सामने बेबस हैं.

मुझे तो डर लग रहा हैं कि गुप्ता जी अपने आप को दिल्ली का मुखिया ना घोषित कर दे.

Wednesday, August 10, 2011

इंग्लैंड में दिल्ली पुलिस

इंग्लैंड बेचारा जल रहा हैं, हिंदुस्तान तो कभी भी जल जाता हैं और फिर अपने आप सब भगवान भरोसे सही हो जाता हैं, अगली बार जलने कि तैयारी में.

लेकिन इंग्लैंड में हालत अलग हैं. वंहा सब पढ़े लिखे होते हैं. क्योंकि वो दुनिया का सबसे बुद्धिमान देशो कि गिनती में आता हैं. हम तो ठहरे देशी गाँव वाले..............

भारत में दिल्ली पुलिस का स्थान बहुत ऊँचा हैं, ऊँचा तो उत्तर प्रदेश पुलिस का भी हैं. दिल्ली पुलिस डंडे को जोर पर और उत्तर प्रदेश पुलिस एन्कोउन्टर के जोर पर.

अब आप सोचिये कि अगर लन्दन में दिल्ली पुलिस को भेज दिया जाय तो मात्र दो से तीन घंटे में ही दंगे पे काबू पाया जा सकता हैं. अभी ताजा -ताजा उदहारण कल का ही लेलिजिये . जंतर -मंतर पे.

Thursday, August 4, 2011

हिंदुस्तान में अच्छे अस्पतालों कि कमी- सोनिया जी अमेरिका में.

हिंदुस्तान के लोकतान्त्रिक व्यस्था पर हमेशा से ऊँगली उठती रही हैं, और उसमे सहयोग होता हैं बड़े -बड़े राजनीतिज्ञों का . आज सोनिया गाँधी अपना इलाज करवाने के लिए अमेरिका चली गई, क्योंकि उन्हें भारतीय अस्पतालों पर और भारतीय डाक्टरों पर बिलकुल ही भरोसा नहीं हैं ( विदेशी जो ठहरी) .

सोचिये कि भारत कि गरीब जनता का क्या हाल होगा. कई तो अस्पताल ही नहीं पहुँच पाते और जो पहुँच जाते हैं वो एम्बुलेंस में दम तोड़ देते हैं. भारतीय अस्पतालों कि हालत सुपर फास्ट ट्रेन के जनरल डब्बे कि तरह होती जा रही हैं. क्योंकि अगर मरीज को बेड नहीं मिलता हैं तो वो बेचारा बाथरूम के दरवाजे के सामने ही चद्दर बिछा कर इलाज शुरू करवा लेता हैं.

सोनिया गाँधी कि हर बीमारी का इलाज अमेरिका में होता हैं. और अगर इलाज ना भी करवाना हो तो भी सोनिया जी महीने में पंद्रह दिन विदेश यात्रा पर ही होती हैं. भारत के प्रधान मंत्री से भी ज्यादा विदेश यात्रा.