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Sunday, May 29, 2011

गुटका कम्पनिया टैक्स कि चोरी कर रही हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने गुटका बनाने वाली कम्पनियों के उपर प्लास्टिक के उपयोग पर रोक क्या लगा दिया, इनका कमाई दोगुनी हो गई.

जो गुटका पहले एक रुपये में मिलता था अब वो खुले आम तीन रूपये में बिक रहा हैं. लेकिन उसके उपर दाम आज भी एक रूपया ही प्रिंट हैं. गुटका बनाने वाली कम्पनिया आज कि तारीख में फैक्ट्री से गुटका बेचते समय अपने डीलर से दो रूपया ले रही हैं जबकि टैक्स और EXISE ड्यूटी वो सिर्फ एक रुपये पर ही दे रही हैं.

Saturday, May 21, 2011

आदरणीय चाची जी नमस्कार.

आदरणीय चाची जी नमस्कार.

चाचा जी को स्वर्गलोक गये जमाना हो गया. हमारी सहानिभूति उनके और आपके साथ हैं. उनकी क़ुरबानी जन्म- जन्म याद रखी जाएगी . और चाची जी आज तो पूरा देश उनको सम्मान दे रहा हैं. जगह -जगह उनकी याद में समारोह आयोजित किये जा रहे हैं और लोग फूलो कि माला स्वर्गीय चाचा जी के फोटो पे लगा रहे हैं.

लेकिन चाची जी एक बात बहुत बुरी लगी. एक तो वैसे ही लोग आपको महंगाई कि देवी कहते हैं, दुसरे आप हैं कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही हैं. अरे चाचा जी के बलिदान दिवस का प्रचार करवाने के लिए आपने पुरे देश के अख़बार वालो के उपर करोडो रूपया फिर खर्च कर दिया.

अगर खाली आपकी पार्टी ने प्रचार करवाया होता तो ठीक लेकिन चाची जी आपने तो पुरे भारत देश के सभी मंत्रालय वालो को खुली छुट दे दी कि बेटा खाने का मौका हैं खा लो .क्योंकि मैंने सुना हैं कि जितने का विज्ञापन अखबार वालो को दिया जाता हैं उसका आधा तो विज्ञापन देने वाले ही खा जाते हैं. साथ ही साथ चाची जी आपकी सेवा में कुछ राज्य भी लगे हुए हैं. उन्होंने अलग से विज्ञापन का मजा लिया.

अब तो आप से येही विनती हैं कि अब और मत खावो मेरी चाची. कंही हाजमा ना ख़राब हो जाये.

Sunday, May 15, 2011

बढ़ा लो बेटा , बढ़ा लो - जितना बढ़ा सकते हो. ---- तारकेश्वर गिरी.

ससुरो तुम्हारे बाप का क्या. तुम्हे रहना खाना आना जाना सब फ्री में मिलता और कभी ज्यादा खा लिया तो जेल भी मुफ्त में मिलती हैं.

लेकिन बेटा चिंता नहीं करना , हमारे मुंह से आवाज नहीं आएगी. आखिर हम जो ठहरे हिन्दुस्तानी. जूता सर पे खायेंगे लेकिन साला तमाशा खुस कर देखेंगे.

वो तो बेरोजगार गली -मोहल्ले के नेता होते हैं , जो पुतला जलाने चले आते हैं, और पुलिश कि लाठी खा करके अपने -अपने घर वापस चले जाते हैं.

हम जैसे लोगो के पास टाइम किधर हैं, कि चौराहे पर जा करके विरोध करे या किसी और तरीके से महंगाई का विरोध करे. अरे पेट्रोल ही तो महंगा हुआ हैं. थोडा ओवर टाइम और सही.

अब किसे बताये कि पेट्रोल के चक्कर में हर चीज महंगी हो गई हैं. अब मेरे जैसे छुट भईया ब्लोगेर खाली लिख ही तो सकते हैं, बड़े ब्लोगेर तो पढने भी नहीं आयेंगे , उनके पास टाइम कंहा हैं.

भाई हिंदुस्तान में किसी के पास टाइम तो हैं नहीं , सब खाली -पीली ब्यस्त हैं. और नेता और मंत्री इसी का तो फायदा उठाते हैं कि जनता तो बोलेगी नहीं. लुट लो सबको.

अभी ब्लोगेर का सम्मलेन करना हो या कोई समूह ब्लॉग बनना हो तो सब चले आयेंगे बिना न्योता मिले भी. टाइम नहीं हैं ना.

वो तो अच्छा हैं कि मैंने अपनी कार में CNG फिट करवा रखा हैं. ससुरा भाड़ में जाये पेट्रोल और पेट्रोल कि कीमत.

Saturday, May 14, 2011

इस्लाम-----तालिबान-----और इंसाफ.

इस्लाम धर्म के अन्दर न्याय कि प्रक्रिया बहुत ही तेज हैं, तुरंत मुकदमा और तुरंत फैसला और तुरंत ही न्याय.

घटना ईरान कि हैं. ईरान में एक युवक ने एक महिला कि आंख में तेजाब डाल दिया जिसकी वजह से महिला कि दोनों आंखे ख़राब हो गई. ईरान कि अदालत ने एक बहुत ही नासमझी भरा (तालिबानी और इस्लामिक दबाव) फैसला दिया कि उस युवक कि दोनों आँखों में पीड़ित महिला तेजाब कि दस बूंद डालेगी , जिससे कि अपराधी कि भी दोनों आंखे सदा के लिए ख़राब हो जाये.

नासमझी इसलिए कि आखिर इस्लामिक अदालत और अपराधी के बीच में अंतर क्या रह गया. अगर एक अपराधी चूँकि वो अपराध कर रहा हैं इसलिए ईस तरह का कदम उठाता हैं, मगर अदालत तो एक सामाजिक और स्वतंत्र न्यायिक व्यस्था हैं जो सभी वर्गों को साथ ले कर के चलती हैं. उसको ये भी देखना चाहिए कि आखिर अपराध हुआ क्यों.

मैंने बहुत लोगो कि बात सुनी लेकिन किसी ने भी अपनी सही राय नहीं दी. कोई कहता हैं कि फैसला सही हैं और कोई कहता हैं कि फैसला गलत हैं,

उस ईरानी महिला से मेरी भी हमदर्दी हैं मगर साथ ही साथ इंसानियत भी हैं.

मेरी खुद कि राय हैं कि आंख के बदले आंख. उस अपराधी कि एक आंख उस महिला को दे दी जाय , जिस से कि महिला भी दुबारा दुनिया देख सके और और वो अपराधी भी.

Wednesday, May 11, 2011

जबरदस्ती लूटते हैं कस्टम पुलिस वाले

शनिवार ( 7 मई) को शुबह मैं बनबसा पहुंचा , और शारदा नदी कि सुन्दरता को देखते हुए नेपाल जाने के लिए आगे बढ़ा. जैसे ही मैं भारत कि कस्टम चौकी के पास पहुंचा तो कस्टम अधिकारीयों ने दिल्ली नंबर प्लेट कि कार को देखते ही गाड़ी के सारे पेपर चेक करने के लिए कहा , और साथ में ये भी कहा कि सारे पेपर लेकर के अन्दर जाइये.

मैं गाड़ी के सारे पेपर लेकर के चौकी के अन्दर गया तो देखा कि तीन कस्टम पुलिस के सिपाही एक २० साल के नौजवान से रुपये छीन रहे थे . मैं तो दंग रह गया , मैंने एक अधिकारी से पूछा, कि साहेब आखिर बात क्या हैं. तो उस अधिकारी ने बताया कि भारत सरकार का नियम हैं कि ५०० रूपये का नोट या १००० रुपये का नोट लेकर के नेपाल जाना अपराध हैं.

मैंने कहा फिर तो मेरे पास भी सारे नोट ५०० रुपए के ही हैं. तो अधिकारी ने एक सिपाही से कहा कि इनको बाहर ले जावो और फ्री कर दो. अन्दर एक नेपाली युवक अपने आप को गरीब और तराई का होने कि दुहाई दे रहा था कि साहेब १ साल के बाद घर जा रहा हूँ मेरे पैसे मत लो.

थोड़ी देर में वो नेपाली युवक भी बाहर आ गया तो मैंने पूछा कि क्या हुआ तो उसने कहा कि १०० रुपए में काम चल गया.

बोर्डर क्रोस करने के बाद नेपाल कि चौकी पर जरुरी कार्यवाई के बाद हम लोग महेंद्र नगर और धनगढ़ी तक घूम कर के शाम को वापस आये . शाम को भी भारत कि चौकी पर एक नज़ारा देखने को मिला.

एक नेपाली साईकिल पर कुछ सामान लादे आ रहा था, उसके देखते ही दो सिपाही उसकी तरफ दौड़े और दोनों ने ही अपने -अपने हाथ उसकी जेब में डाल दिया, एक का हाथ तो खाली वापस आया और दुसरे के हाथ में कुछ नोट , नेपाली युवक मुस्कुराते हुए चला गया.