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Thursday, April 28, 2011

शौचालय का गन्दा पानी पी रहे हैं, गाँव के लोग. -----------------------तारकेश्वर गिरी.

सरकार ने गाँव में शौचालय कि व्यस्था के सुधारने के लिए अभूतपूर्व कदम उठायें हैं, जगह -जगह दीवाल पर और मीडिया के माध्यम से गाँव कि जनता को जागरूक भी किया जाता रहा हैं कि , अपने घर या आस-पास शौचालय का निर्माण कराएँ जिससे कि महिलावो को परेशानी ना हो.

गाँव में शौचालय के निर्माण में होने वाले खर्च में प्रदेश कि सरकार भी आर्थिक रूप से मदद करती हैं. जिससे कि गाँव के अन्दर खास कर के महिलावो को आसानी हो और खुले में ना जाना पड़े.

लेकिन एक दूसरा पहलु ये हैं कि ये शौचालय जमीन के अन्दर पीने के पानी को प्रदूषित कर रहे हैं. क्योंकि जो शौचालय गाँव में बनाये जा रहे हैं , उनमे लगभग पांच से आठ फुट तक का गहरा गड्ढा ( छोटा सा कुंवा ) बनाया जाता हैं जिसकी दिवाले झरोके दार होती हैं और नीचे का हिस्सा कच्चा होता हैं . उसकी वजह ये होती हैं कि शौचालय का गड्ढा जल्दी ना भरे और उसके अन्दर का पानी मिटटी सोख ले.

मिटटी पानी सोखती तो हैं , मगर वो पानी रिस कर के और नीचे पीने के पानी में मिल जाता हैं. और शौचालय के आस पास जो भी हैण्ड पम्प होते हैं उनसे ये पानी बाहर आता हैं . क्योंकि मिटटी से रिस करके गन्दा पानी पीने के पानी में मिलता हैं , इसीलिए ये हमेशा साफ दीखता हैं.

और नतीजा नई - नई बीमारी........................................................................

Wednesday, April 27, 2011

तिहाड़ जेल - सपनो का आशियाना. ----------------------------तारकेश्वर गिरी.

एक ज़माने में लोग तिहाड़ जेल को बड़ी ही गन्दी नज़र से देखते थे. और तिहाड़ मोहल्ले से दूर ही रहना पसंद करते थे. जमाना बदलता गया और लोगो कि सोच भी .

पुराने ज़माने में बुधजिवी और अमीर वर्ग तिहाड़ को बड़ी गन्दी नज़र से देखता था, लेकिन आज उसका रूप बदल गया हैं, जबसे अदालत ने फ्लैट आवंटन का काम अपने जिम्मे लिया तब से केंद्र सरकार के मंत्री और अधिकारी के बीच में होड़ लग गई हैं , कि पहले आवो ओर पहले पावो.

वैसे तो सरकार लोगो के लिए काफी अच्छी सुविधाएँ उपलब्ध करा रही हैं, जैसे कि अच्छा खाना-पानी, और भी बहुत कुछ.

अभी तो बहुत से हस्तियों के लिए जगह हैं, लेकिन थोडा समय लग रहा हैं क्यंकि साफ -सफाई का काम अभी बाकि हैं.

Tuesday, April 26, 2011

आई अब शीला कि बारी........ तारकेश्वर गिरी.

फिल्म ख़त्म हो चुकी हैं, दर्शक सिनेमा हाल से निकल कर के फ़िल्मी dailog के उपर चर्चा कर रहे हैं.

फिल्म का नाम - अरबो का घोटाला , पटकथा और संवाद - अखिल भारतीय भ्रस्टाचार कमिटी, डाइरेक्टर - सुरेश कलमाड़ी, सह डाइरेक्टर शीला दीक्षित .

पिछले पांच साल कि कड़ी मेहनत के बाद पंद्रह दिन कि शूटिंग हुई, फिल्म रिलीज़ भी हुई , कमाई इतनी कि अगली सात पीढियां निक्कमी भी हो जाय तो चिंता नहीं.

नरसिंह राव जी के उपर मुकदमा चलता रहा, लेकिन एक दिन वो खुद ही चल लिए. क्या करे हमारा संविधान भी तो सबूत मांगता हैं.

आज कल शीला जी काफी परेशान हैं, तो कल रेडियो पे एक गाना बाज रहा था कि " आई अब शीला कि बारी".

जय हो भारत देश कि ....................सचमुच भारत भगवान भरोशे चलता हैं.

Saturday, April 9, 2011

हमने भी देखा हैं गाँधी को- तारकेश्वर गिरी.


दादा जी बचपन में
सुनाते थे,
अपने बारे में बताते थे,

गाँधी जी के किस्से
नमक कि कहानी
दादा जी कि जुबानी.

कहते थे हम सबसे,
गाँधी जी को
करीब से देखा हैं.

समय बदल गया,
गाँधी जी के
पुतले के साथ .

अब तो मेरे बच्चे भी
कहेंगे कि
हमने भी देखा हैं गाँधी को

जंतर -मंतर पे,
भूखे -लेटे हुए
अन्ना हजारे को .

चोरो ने किया हाथ साफ - तारकेश्वर गिरी.

कल सुबह जैसे ही कार साफ ( धुलाई ) करने वाले ने आ करके हमें जगाया तो रोज कि तरह हमने दरवाजा खोल कर के कार कि चाबी पकड़ा दी, उसने चाबी पकड़ने से पहले ही हमें बता दिया कि आपकी कार के पीछे का ग्लास गायब हैं,

इतना सुनते ही हमारी अलसाई हुई नीद भी गायब हो गई, भाग कर के बाहर निकले और देखा कि सचमुच कोई चोर हाथ साफ कर गया हुआ हैं. चोर ने बड़ी ही सावधानी से पिछले ग्लास कि रबर उतार करके के पूरा का पूरा बिना किसी नुकसान के ग्लास उतार करके पीछे कि सीट पे रख दिया, और अन्दर घुस करके E.C.M. कि चोरी कर गया.

नया E.C.M. बाज़ार में लगभग २५०००/- का मिलता हैं, मगर पुराना E.C.M. (चोरी वाला) लगभग ६०००/- में मिल जाता हैं,

एक मिस्त्री से बात कि तो उसने फिटिंग चार्जेस सहित ८०००/- रूपया मांगे.

अब त हमें भी अन्ना बाबा कि याद सताने लगी हैं, अपने मोहल्ल्ले वालो से बात करके इतवार कि शाम को कैंडल मार्च निकलवाना ही पड़ेगा, चोरो के खिलाफ.