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Wednesday, March 23, 2011

थक गई हूँ मैं प्यास सबकी बुझाते हुए, ------ तारकेश्वर गिरी.

मुझे बचा लो ईस ज़माने से
इन बेवफा प्रेमियों से
इन धोखेबाजो से,

थक गई हूँ मैं
प्यास सबकी बुझाते हुए,
कोई मेरी भी प्यास बुझा दे.

मदद के लिए सब आगे आते हैं
गन्दा करके जाते हैं
करोडो का चंदा खुद ही खा जाते हैं.

कंही सुख ना जावूँ मैं
ईस धरा से
रेगिस्तान कि तरह,

मैं नदी हूँ , प्यास बुझाती हूँ
कुछ मेरे लिए भी रहने दो
कंही मैं प्यास्सी ही ना रह जावूँ.

Tuesday, March 22, 2011

और कितना इंतजार करूँ. ------तारकेश्वर गिरी.

और कितना इंतजार करूँ ,
किस हद तक डूब जावूँ
तेरा प्यार पाने के लिए.

आज भी याद हैं वो पल
जब मिले थे पहली बार,
तेरे इंतजार में , सड़क पर.

लम्हा -लम्हा वक्त गुजर गया
हम चलते रहे साथ उनके,
बस उनके इंतजार में.

आज भी साथ हैं वो
मगर दूर से,
इंतजार में , मैं खड़ा.

Sunday, March 20, 2011

प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह को इस्तीफा देना ही पड़ा.---------तारकेश्वर गिरी

आज सुबह सात बज करके पचपन मिनट पर भारत के सबसे कमजोर प्रधानमंत्री ने इस्तीफा दे दिया. विपक्ष कि नारेबाजी से परेशान श्रीमान मनमोहन सिंह जी ने कठोर निर्णय लिया हैं. उन्होंने अपना इस्तीफा श्रीमती सोनिया गाँधी के कहने पे तैयार किया और आज सुबह- सुबह राष्ट्रपति महोदया के घर जा करके दे दिया.


विश्वस्त सूत्रों से पता चला हैं कि मनमोहन सिंह ने अपना इस्तीफा विपक्ष के दबाव में नहीं बल्कि सोनिया गाँधी के दबाव के चलते दिया हैं.


हुआ ये कि सुबह -सुबह ही मनमोहन सिंह जी को सपना आया कि सोनिया गाँधी जी ने उनके लिए और अपने लिए इटली में एक खुबसूरत एक कमरे वाला महल पसंद कर लिया हैं, और ये दोनों कुछ ही दिनों में वंहा रहने लगेंगे. अब ये सपना देखते ही सरदार जी बिना नहाये धोये चले गये सोनिया जी के पास , और कहने लगे मैडम इटली तो बाद में चलेंगे पहले होली तो खेल ले..........


बस तुरंत मनमोहन सिंह जी के ऊपर दबाव आया. और इस्तीफा देना पड़ा.


बुरा न मानो होली हैं , बुरा ना मानो होली हैं, बुरा न मानो होली हैं.

Friday, March 18, 2011

होली और मेरा गाँव. -- तारकेश्वर गिरी.

जैसे जैसे होली नजदीक आती जा रही रही वैसे वैसे बचपन कि यादे भी आ रही हैं. वो दिन जब होलिका दहन के लिए उपले और लकड़ी चुरा-चुरा के इक्कठा करना, ईस बात कि होड़ लगी रहती थी कि किस गोंव कि होलिका कि आग सबसे उपर जाएगी.

होलिका दहन कि शाम को दादी और मेरी माता जी हम सब भाई बहनों को उबटन (कच्ची सरसों पीस कर ) कर के पुरे शरीर पर मालिश करती थी, और जो मैल शरीर से निकलती थी उसे होलिका में डाल दिया जाता था. उस समय तो ईस बात क मतलब पता नहीं था, मगर आज लगता हैं कि ठण्ड के मौसम में सही तरीके से शरीर कि सफाई नहीं हो पाती थी, इसलिए होली के (गर्मियों कि शुरुवात) मौसम में उबटन से मालिश कि जाती थी.

होलिका दहन से पहले भोजपुरी गीत गाती पुरे गाँव कि महिलाये और आग लगाते समय होलिका कि जय करते हुए गाँव के लोग , सोचता हूँ तो बस, सोच कर के ही आनंद आ जाता हैं.

आधी रात तक माता जी और दादी जी के साथ पकवान बनाना, और सुबह उठते ही बच्चो कि भीड़ में शामिल हो जाना और जोर से " कबीरा सा रा रा रा रा "

बाकि कल ...............................

Sunday, March 13, 2011

अब जाटो के बाद ब्राह्मणों को भी चाहिए - तारकेश्वर गिरी.

बचपन से पुस्तकों में पढता आया हूँ कि एक गाँव में या एक शहर में एक गरीब ब्राहमण रहता था. पुराने राजा महाराजवो के ज़माने में भी ब्राहमण गरीब ही रहा. सिर्फ उतनी ही भिक्षा चाहिए होती थी जितने में कि उसका और उसके परिवार का पेट भर जाये.

जजमानो के यंहा जा जा करके पूजा पाठ करके जो भी मिलता उसी से कम चल जाता. और हाँ इतना जरुर था कि ज्ञान का धनी ब्राहमण सिर्फ ज्ञान का ही धनी रह गया, बड़े -बड़े राजा महाराजवो को ज्ञान देने वाले आज खुद ऊँची जाती का होने कि वजह से हर तरह कि सरकारी सुविधावो से वंचित हो गया.

Friday, March 11, 2011

दुनिया का अति आधुनिक देश जापान सुनामी और भूकंप कि चपेट में- तारकेश्वर गिरी.

जापान पहली बार इतना भयानक भूकंप और तेज सुनामी कि लहरों में घिरा हुआ हैं. वैसे तो जापान में आये दिन हलके फुल्के भूकंप के झटके महसूस किये जाते हैं, मगर आज का भूकंप और सुनामी कि तेज लहरों ने जापान के भूगोल कि बिगाड़ दिया.

बर्बादी कि एक विडिओ फुटेज : -
http://www.youtube.com/watch?v=zY2HPT7obWE&feature=player_embedded#at=20

Tuesday, March 8, 2011

नारी सुरक्षा अभियान. - तारकेश्वर गिरी.

आज सारे बड़े -बड़े लेखक धुरंधर ब्लोगेर और बहुत से लोग महिला दिवस में अपने अपने विचारो के तीर चलाये जा रहे हैं. लेकिन क्या खुद अपने घरो में नारी कि स्थति पर कभी नज़र डाला हैं किसी ने.

चाहे वो पुरुष हो या महिला दोनों ही महिलावो कि अनदेखी करते हैं. पुरुष तो सदैव उपेक्षा करता आया हैं मगर महिलाये भी कम नहीं हैं.

दहेज़ कि मांग हो या सास बहु के झगडे , या ननद भाभी के किस्से . घर कि बूढी औरते चाहती हैं कि उनके घर में लड़का ही पैदा हो ना कि लड़की.

पुरुष समाज तो सदा ही महिलावो के विचारो को दबाता चला आ रहा हैं. लेकिन महिला वर्ग खुद उसी पुरुष वर्ग के साथ मिल करके महिलावो को ही दबाने में लगी हुई हैं.

बड़े -बड़े लेख लिखने से और बधाई देने से सिर्फ महिला दिवस नहीं मनाया जाता हैं, करिए कुछ अपने घर कि महिलावो के लिए. अपनी माँ के लिए अपनी पत्नी के लिए अपनी प्यारी सी बिटिया के लिए. या अपनी सासु माँ के लिए अपनी ननद के लिए .

Thursday, March 3, 2011

अभी भी अधुरा हैं इस्लाम - तारकेश्वर गिरी.

दुनिया के ५० देशो में जिसकी हकुमत चलती हो , वो भी आज अधुरा हैं. वजह हैं , अज्ञानता . एक तरफ पूरी दुनिया इस्लामिक आतंकवाद से परेशान हैं , तो दूसरी तरफ भारत में बैठे कुछ बुधजिवी वर्ग इस्लाम कि एक नई तस्वीर दुनिया के सामने लाने में लगे हुए हैं.

आखिर इस्लाम हैं क्या...................................... ?

क्या सचमुच इस्लाम शांति का सन्देश देता हैं , अगर देता हैं तो क्यों हजारो निर्दोष इस्लाम और ईस निंदा के नाम पर मारे जाते हैं.

क्यों पाकिस्तान कि हालत ईस समय सिर्फ इस्लाम के नाम पर ख़राब हो रही हैं. आज कि हालत ये हैं कि पाकिस्तान में गैर मुस्लिम नहीं रह सकता . आखिर क्यों.---------------------- ?

क्या पाकिस्तान सिर्फ मुसलमानों के लिए बना हैं. किसी और धर्म के लिए नहीं.

क्या कुरान कि आयते कहती हैं कि, -- हे मुसलमानों मारो तुम. उन सबको जो मुसलमान ना हो..