Add

Monday, January 31, 2011

हिन्दू दुनिया में सबसे बड़े अंध विश्वासी होते हैं.-तारकेश्वर गिरी.

हिन्दू दुनिया में सबसे बड़े अंध विश्वासी होते हैं.


तभी तो कभी तुलसी की पूजा करते हैं कभी पीपल की कभी हल्दी की तो कभी दूब (एक प्रकार कि घास) की , कभी नीम की तो कभी आम की (आम के पत्तो की )

लेकिन मेरे समझ से ये कभी भी अंध विश्वाश नहीं हैं. हाँ वो अलग बात हैं की हमारी इटालियन सरकार ने लोगो के दिमाग में गोबर भर दिया हैं. जंहा तक मेरा मानना हैं की पुराने ज़माने में ऋषि -महर्षियों ने आपने ज्ञान के बल पर जो भी उपयोगी बाते थी उनको सामाजिक जीवन में अपनाने के लिए सामजिक तौर तरीके के साथ जोड़ दिया.

हल्दी के गुडो के बारे में सबको पता हैं , साथ ही दूब नामक घास भी हल्दी कि ही तरह उपयोगी होती हैं तभी तो पूजा पाठ में भी इन चीजो का इस्तेमाल होता हैं . नीम , पीपल , तुलसी , बरगद हमेशा ओक्सिजन छोड़ते हैं और कार्बन डाई ओक्सैड़ अपनी तरफ लेते हैं. और ये लुफ्त ना हो जाये इसीलिए इन पौधों को सामाजिक रीती-रिवाज के साथ जोड़ दिया ताकि लोग इनको बचा सके और पर्यावरण नियंत्रण में बना रहे.

पीपल बे बैठा भुत नामक कहावत लोगो को डराती रही कि लोग पीपल के पेड़ को नुकसान ना पहुंचाए।

अब बेवकूफ लोग इस बात को अन्धविश्वाश का दर्जा देंगे तो हम क्या कह सकते हैं। हाँ कुछ ना कुछ अपवाद हैं हमारे समाज में और उसे दूर भी करना चाहिए। जैसे कि पीपल के पेड़ पर सरसों का तेल चढ़ाना (हर शनिवार को ), इस से पीपल के पेड़ को काफी नुकसान होता हैं।

तुलसी कि सुगंध से अस्थमा नामक बीमारी दूर भागती हैं, तो नीम अपने आप में हैं ही गुड कारी।

Sunday, January 16, 2011

अवैध जगह पर मंदिर हो या मस्जिद , सबको गिरा देना चाहिए. - तारकेश्वर गिरी.

मंदिर हो या मस्जिद अगर अवैध हो तो सबको गिरा देना चाहिए।

अवैध रूप से बनाई गई कोई भी धार्मिक ईमारत को क़ानूनी मान्यता नहीं मिलनी चाहिए. कुछ असामाजिक लोगो के द्वारा रातो रात धार्मिक भवन बना देने से पूरा का पूरा समाज परेशान हो जाता हैं.
आज की तारीख मैं कुकुरमुत्ते की तरह जगह -जगह धार्मिक स्थल मिल जायेंगे। किसी भी सरकारी जमीन पर कब्ज़ा करना हो तो एक मंदिर या मस्जिद बनवा दी जायगी. उसमे प्रमुख भूमिका होती पोलिस की. बाकि तो बेवकूफ भीड़ आपने आप ही संभाल लेगी.

खास कर के सफ़ेद पोश , सफ़ेद पोश वो लोग जो आपने आप को ये समझते हैं कि राजनीती उनके बाप की बपौती हैं. DDA के द्वारा निजामुद्दीन मैं अवैध रूप से बनाई गई मस्जिद गिरा दी गई तो श्रीमान बुखारी खुदी नमाज़ पढने चले गये. वैसे बुखारी साहेब ने भले ही उस मस्जिद की कभी शक्ल ना देखि हो. श्रीमान मुलायम सिंह को माखन लगाता देख भला शीला जी कैसे चुप रह सकती हैं आखिर बात जो ठहरी उनके मोहल्ले कि। वो तो भला हो भगवान का कि शिव जी सेना अभी तक शांत हैं नहीं तो वो भी अब तक जय भोले -भंडारी का नारा लगाते पुष्प विहार (दिल्ली) मैं पहुँच जाते जंहा पर DDA ने एक मंदिर भी तोड़ दिया हैं।
लेकिन हैं तौबा मचाने से जनता को क्या मिलता हैं। जनता जनार्दन को खुद ही सोचना चाहिए कि जब मंदिर या मस्जिद सरकारी जमीन पर बनेगे तो अवैध तो कहलायेंगे ही।
लेकिन वाह रे शील जी और दिल्ली के L G महोदय. आप लोगो ने तो कोर्ट को भी अपने-अपने बाप कि जमीदारी समझ रखा हैं।
और रही बात नमाज पढने वाली भीड़ कि तो चाहे भले ही वो कभी भी नमाज ना पढ़ती हो मगर विवादित जगह पर जरुर नमाज अदा करेंगे। और उसी तरह घर मैं तो कभी पूजा पाठ कि नहीं, माँ -बाप कि सेवा तो कभी करी नहीं चल देते हैं हर -हर महादेव का नारा लगाते हुए विवादित जमीन पर अपना अधिकार दिखाने।

Tuesday, January 11, 2011

पुरुष प्रधान देश हैं भारत, महिला प्रधान नहीं हैं. - -- तारकेश्वर गिरी.

जी मैं तो येही सुनता आया हूँ आज तक, कि भारत पुरुष प्रधान देश हैं, और येही वजह हैं कि भारत में महिलावो कि स्थिति चिंताजनक हैं. ये आवाज खास करके उन महिलावो कि तरफ से आती हैं, जो अपने आप को समाज मैं कुछ ज्यादा ही बुधजिवी समझती हैं.

मैं पिछले कुछ दिनों से काफी परेशान रहा कि आखिर इसकी वजह क्या हैं. आखिर क्यों भारत ही पुरुष प्रधान देश हैं, बाकि देश क्यों नहीं. क्यों भारत मैं महिलावो कि स्थिति चिंताजनक हैं.

पिछले कुछ दिनों से मैं DISCOVERY CHANNEL देखने पर ज्यादा जोर दे रहा था. वंहा जाकर देखा तो ये पाया कि भारत ही नहीं अपितु पूरा विश्व पुरुष प्रधान देश हैं, और येही नहीं पूरा जीवित संसार ही पुरुष प्रधान देश हैं.

एक बबर शेर जंगल मैं अपने एरिया पर नियंत्रण रखता हैं, उसकी टीम मैं मादा सहयोगियों कि शंख्या काफी होती हैं. लेकिन क्या मजाल कि कोई शेरनी किसी और के एरिया मैं चली जाय. ये तो एक उदहारण था. चाहे जल मैं रहने वाले प्राणी हो या आकाश मैं उड़ने वाले पक्षी, या धरती पर रहने वाले जीवित प्राणी, हर जगह आपको नर प्रधान ही मिलेगा. या कह ले कि पुरुष प्रधान ही मिलेगा.

ऐसा क्यों हैं ये मुझे नहीं पता.

रही बात इंसानी बस्तियों कि तो पुरे दुनिया मैं सदैव पुरुषो का ही वर्चश्व रहा हैं. लेकिन भारत उनमे से अलग हैं. हमारे ऋषि मुनियों ने नारी को देवी का दर्जा दिया, नारी के कई रूप दिखाए और हर रूप मैं नारी कि पूजा कि.

सनातन धर्म को छोड़कर के दुनिया के शायद ही किसी धर्म ने नारी पूजा पर जोर दिया हो. या नारी को सम्मान दिया हो. दुर्गा, काली हो या माता चामुंडा जिन्हें शक्ति के रूप मैं जाना और पूजा जाता हैं, विद्या कि देवी सरस्वती हो या धन कि प्राप्ति के लिए लक्ष्मी . गंगा हो या यमुना , सरस्वती हो या नर्मदा, कंही ना कंही भारतीय समाज इस बात कि तरफ इशारा करता हैं कि भारत सिर्फ पुरुष प्रधान देश ही नही अपितु महिला प्रधान देश भी हैं.

भारत के अन्दर जन्म लेने वाली महिलावो मैं सावित्री हो या गार्गी, ये अगर किसी और देश मैं अपने ज़माने मैं पैदा हुई होती तो शायद इतना सम्मान नहीं मिलता. या अगर आप कि ऐसी गैर भारतीय महिला को जानते हो जो आज से १००० साल से भी पहले उपलब्धि प्राप्त कर चुकी हों. शायद नहीं.

इतने के वावजूद लोग क्यों कहते हैं कि भारत सिर्फ पुरुष प्रधान देश हैं. .......

खैर जाते जाते एक बात आप सब से कहना चाहूँगा कि आप अपनों बच्चो को BIKE तो दें मगर आधी रात को सड़क पर स्टंड करने के लिए नहीं. पूरी नज़र रखे. कंही किसी कि नज़र ना लग जाये.

Saturday, January 8, 2011

कमेन्ट माफिया .................तारकेश्वर गिरी.

आज कल हमारे ब्लॉग जगत पर एक अलग सा माफिया ग्रुप का कब्ज़ा हो गया। इस माफिया ग्रुप का नाम मैंने रखा हैं कमेन्ट माफिया या सी कंपनी भी कह सकते हैं।

कुछ लोगो का आपसी ग्रुप इतना मजबूत हो चूका हैं कि अगर किसी ब्लोगेर ने दादी कि सुनी हुई कहानी भी लिख दी तो ७०- ८० कमेन्ट तो मिल ही जाता हैं। और कुछ ब्लोगेर बंधू तो ऐसे हैं कि सिर्फ महिलावो के ब्लॉग पर ही टिप्पड़ी करेंगे। और कुछ कि तो बात ही अलग हैं।

कुछ बंधू तो nice लिख कर के चलते बनते हैं।

भाई लोग ऐसा क्यों करते हैं। मैंने बहुत से ऐसे ब्लॉग देखे हैं जिनमे बहुत सी अच्छी -अच्छी जानकारी दी गई, होती हैं, धर्म के उपर बहुत से ब्लॉग अच्छी जानकारी देते हैं। समाज के उपर हो या विज्ञानं के उपर लेकिन ऐसे लेख बिना पढ़े ही रह जाते हैं। आज कि राजनितिक हलचल हो या महंगाई , कोई नहीं जाता , बेचारा लिखने वाला भी सोचता हैं कि में क्या लिखू।

में अपनी बात ही कह दू, कि अगर मैं किसी कि बुराई करता नज़र आ जाऊ तो लोग दबा के टिप्पड़ी करेंगे लेकिन अगर कोई अच्छी बात लिखने लगु तो ऐसे लगता हैं कि साली टिप्पड़ी भी नासिक के प्याज के खेते से आ रही हैं।

खैर अब देखता हूँ।

Friday, January 7, 2011

मुझको भी मंत्री बनना हैं.......तारकेश्वर गिरी.

लाल पीली बत्ती , पंद्रह -बीस ठो गार्ड
सैकड़ो चमचे, मुझको भी चुनाव लड़ना हैं।

दस- पंद्रह गो मर्डर, ढेर सा अपहरण,
सौ दो सौ से बलत्कार, मुझको भी नेता बनना हैं।

बीस -पचीस दारू के ठेके, पचास -साठ पेट्रोल पम्प,
बारह -तेरह बोलेरो गाड़ी, मुझको भी मंत्री बनना हैं।

अगल -बगल में सुंदरियाँ , नया नवेला फार्म हाउस,
अधिकारी हमरे नीचे, मुझको भी मंत्री बनना हैं।

स्वीट्जेर लैंड में बैंक का खाता, अरबो का हो बैलेंस,
रोज नए -नए घोटाले , मुझको भी मंत्री बनना हैं.

इंसानियत और धर्म... -------------तारकेश्वर गिरी.

इंसानियत बड़ी हैं या मनुष्य का धर्म. पहले भी इस मुद्दे पर काफी बहस हो चुकी हैं. लेकिन फिर भी मैं चुप ना रह सका , क्योंकि अगर चुप रहे तो सब खो देंगे.


धर्म सदैव ही मनुष्य कि भलाई के लिए पैदा किये जाते हैं, ना कि समाज को लड़ाने के लिए. और धर्म कभी भी इतना कठोर नहीं होना चाहिए कि उसका पालन ना करने वालो को मौत कि सजा दे दी जाय. धर्म हमेशा सही राह दिखाने के लिए लाये जाते हैं, और समय के साथ -साथ धर्म ( समाज) में बदलाव भी जरुरी हैं.


एक ही समाज में रहने वाले बहुत से लोगो के लिए जरुरी नहीं हैं कि एक ही धर्म को माने. विपरीत धर्म के लोग भी एक समाज बना के रहते हैं और आपस में भाई -चारा कायम रखते हैं.


पाकिस्तान के एक गवर्नर श्रीमान तासीर कि हत्या सिर्फ इस लिए कर दी गई कि वो चाहते थे एक इसाई महिला को दी गई मौत कि सजा को कम करवा सके. लेकिन पाकिस्तान के अन्दर धर्म पर अंतकवाद हावी हो चूका हैं, और वंहा के धार्मिक नेता कभी भी इस तरह का बदलाव नहीं चाहते. नतीजा ये रहा कि उन्ही के सुरक्षा कर्मी ने गोलियों से भुन डाला. और आज पाकिस्तान के लोग उसे गाजी कहने लगे हैं.

और ये साफ संकेत हैं पाकिस्तान के लिए कि उसके समाज में धार्मिक अंतकवाद गहरी पैठ बना चूका हैं. और अगर इसी तरह रहा तो पाकिस्तान का समाज एक न एक दिन अपने आप ही इस्लामिक बम से ख़त्म हो जायेगा.


कभी - कभी तो ये सोच करके बहुत दुःख होता हैं कि क्या सचमुच इस्लामिक विचार -धारा में कभी भी बदलाव नहीं होगा.