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Wednesday, March 31, 2010

कुरान और पुराण के चक्कर मैं चले गए डॉ अनवर जमाल.अब उनकी जगह कौन लेगा.


भाई वाह ! क्या बात हैकुरान और पुराण के चक्कर मैं डॉ अनवर जमाल और उनके चेले गायब ही हो गए जैसे गधे के सर से सिंघ

हुआ ये की सारे मौलाना ने बैठकर के मीटिंग की, कि ये हमारा अनवर जमाल अल्लाह को शिव कह रहा हैये तो कह रहा है की शिव ही जगत के पालन हार हैंशिव ही कल्याण करते हैइसने तो कुरान की जगह लगता है की पुराण पढ़ लिया हैबस भाई और क्या साबुत चाहिए कट्मुल्लावो को, वैसे भी ये सारे कुरान को ही सबुत मानते हैंइसी के आधार पर सुना दी सजा हमारे प्रिय मित्र श्रीमान डॉ अनवर जमाल जी को

लेकिन डॉ अनवर जी भी कंहा हार मानने वाले हैं , उन्होंने भी अपनी पूरी कि पूरी ज्ञान वर्धक ताकत का इस्तेमाल करते हुए सबको जबाब दिया.

श्रीमान अनवर जमाल जी का जबाब
* मेरे प्रिय मौलानावो आप लोग क्या बकते रहते हैं , शायद आप को ये भी नहीं पता कि पुराण का ही बिगड़ा हुआ नाम है कुरान
*दूसरा ये कि पुरे संसार मैं अल्लाह या भगवान शिव ने जानवर के साथ-साथ इन्सान भी पैदा किये हैं
*तीसरा ये कि सिर्फ इन्सान ही सबसे तेज दिमाग रखता है, जानवर या हिन्दू या मुसलमान या कोई और धर्म को मानाने वाला नहीं
*चौथा ये कि सभी इन्सान एक जैसे ही दिखते हैं तो फिर कोई मुसलमान या हिन्दू या कोई और संप्रदाय का क्यों
* पांचवा ये कि क्या इस्लाम से पहले इस दुनिया मैं इन्सान नहीं रहते थे
* छठा ये कि क्या अल्लाह सिर्फ उनकी मदद करता है जो मुसलमान हैं , तो क्या बाकि जाती या धर्म के लोग कैसे जीते हैं और क्यों वो लोग भी आराम कि जिंदगी जी रहे हैंअल्लाह उनको नरक मैं क्यों नहीं भेजता

रही बात अल्लाह और शिव कि, तो मैं सच्चा मुसलमान हूँ और अल्लाह का बंदा हूँ


ये सच्चा और कच्चा मुसलमान क्या होता मेरे अनवर भाईये आप जैसा ज्ञानी या आप के चेले ही बता सकते हैं









Sunday, March 28, 2010

Tarkeshwar Giri जी वह लेख हमारे फायदे में था वर्ना आपको अब तक 10 बार समझा दिया गया होता, भूल गये ब्‍लागिंग में वाइरस नाम की कोई चीज है,-Mohammed Umar

कैरान्वी साहेब , मुझे वाइरस दिखाने से अच्छा है की खुद में वाइरस देखोमैंने तो सिर्फ प्रितिबिम्ब दिखाया है, एक छोटा सालेख आपके फायदे मैं था इस लिए आप शांत हैनहीं तो आप क्या समझाते मुझेसमझाना ही है तो समझाइये अपने डॉ अनवर को

कंहा थे आप जब अनवर साहेब खुले रूप मैं धर्म ग्रंथो के बारे मैं उल्टा पुल्टा लिख रहे थेमैंने तो सिर्फ आपके पवित्र कुरान की कॉपी दिखाई है

किसी के धर्म ग्रंथो में से सिर्फ कमिया निकाल कर के लोगो के सामने रखना कंहा की समझदारी थीतब तो बहुत गुरु जी गुरु जी कह कर के सर पे चढ़ा रखा thaa।

और मैंने फिर भी अपने संस्कारो का परिचय देते हुए लोगो को ये दिखाने की कोशिश की है धर्म ग्रंथो का आधार हजारो साल पहले के समाज के ऊपर आधारित था ना की आज के हिसाब से





दुध की सफेदी काली पड़ने लगी है।

दुध की सफेदी काली पड़ने लगी हैक्योंकि दिन प्रतिदिन दुध के दामो मैं उछाल रहा हैदुध है की पानी -पानी होता जा रहा है और लोग कमा -कमा के काले हुए जा रहे हैंअब लोग करे भी तो क्या करेबिना दुध के काम भी तो नहीं चलने वाला हैसुबह उठते ही घर के बड़े चाय और बच्चे दुध की मांग शुरू कर देते हैंदुध बेचने वाली कंपनिया मोटी काट रही हैक्योंकि उन्हें पता है की बिना दुध के काम तो चलने वाला नहीं है

सरकार अपने आप में मस्त है उसे अभी फ़िलहाल कोई फर्क पड़ने वाला नहीं हैक्योंकि वो पूरी तरह से बहुमत में हैऔर चुनाव अभी बहुत दूर है आखिर चुनाव के लिए चंदा तो येही कंपनिया ही देंगी नाआखिर विरोध करे तो करे कौन

शायद हम और आप मिल कर के इसका विरोध कर सकते हैं सड़क पर खड़े हो कर के नारे लगाने की कोई जरुरत नहीं है और ही कोई नई पार्टी बनाने की जरुरत है इसका विरोध तो हम अपने -अपने घरो में बैठ कर के ही कर सकते हैं

बस करना ये ही है की हमें हफ्ते में किसी भी एक दिन दुध का घर बैठे बहिष्कार करना होगाउस दिन कोई भी चाय या कोफ़ी नहीं पिएगाबच्चो को उस दिन दुध की जगह ताजे फलो का रस पिलाना होगाफिर देखिये कैसे दुध बेचने वाली कंपनियों की आँखे खुलती हैअगर हमने मिलकर के सिर्फ हफ्ते में एक दिन दुध का बहिष्कार कर दिया तो इन कंपनियों की ऐसी की तैसी हो जाएगी

और अब करना पड़ेगाअगर आप सभी लोग चाहते हैं की महंगाई रुके तो



Saturday, March 27, 2010

अल्लाह बड़ा ही दयावान है - धर्म परिवर्तन क्यों जरुरी था।

अल्लाह बड़ा ही दयावान है उसे उस हर चीज की जानकारी है जो इस दुनिया मैं हो रही है और जो नहीं हो रही है उसके बारे मैं भी अल्लाह को सब पता है अल्लाह सभी इंसानों को एक नज़र से देखता , क्योंकि वो अल्लाह हैं अल्लाह की नज़र में कोई अमीर और कोई गरीब नहीं है वो तो सबका पालन हार है

लेकिन सवाल ये है की जब अल्लाह सबको एक ही नज़र से देखता है तो बाकि लोग और धर्मो को क्यों मानते हैंक्यों सभी लोग अल्लाह की बंदगी करेक्यों कोई यहूदी बना पड़ा है तो कोई इसाई और कोई हिन्दू और बहुत से मतों और भगवानो को मानने

शायद पुराने ज़माने मैं स्थिति कुछ और रही हो । और उसी स्थिति को दिखाने के लिए लाया हूँ पवित्र कुरान के एक पन्ने की कोपी।


आप पवित्र कुरान के इस पन्ने को पढ़कर ये अंदेशा लगा सकते हैं की उस ज़माने में धर्म परिवर्तन क्यों जरुरी था




Friday, March 26, 2010

तुम्हारी हत्या पर भी रख लेंगे २ मिनट का मौन

तुम्हारी हत्या पर भी रख लेंगे २ मिनट का मौन
(अभागे भारतीय की फरियाद पर सिक-यू-लायर(Sick you Liar, बीमार मानसिकता वाले झुट्ठे) नेता द्वारा सांत्वना भरे कुटिल उपदेश की तरह पढ़ें)
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अच्छा!!! वो दुश्मन है? बम फोड़ता है? गोली मारता है?
मगर सुन - दोस्ती में - इतना तो सहना ही पड़ता है
तय है - जरुर खोलेंगे एक और खिड़की - उसकी ख़ातिर
मगर - हम नाराज़ हैं - तेरे लिए इतना तो कहना ही पड़ता है

तुम भी तो बड़े जिद्दी हो - दुश्मन भी बेचारा क्या करे
इतने बम फोड़े - शर्म करो - तुम लोग सिर्फ दो सौ ही मरे ? (कितने बेशर्म हो तुम लोग)
चलो ठीक है - इतने कम से भी - उसका हौंसला तो बढ़ता है
और फिर - तुम भी तो आखिर १०० करोड़ हो(*) - क्या फर्क पड़ता है?
[(*) ११५ करोड़ में १५ करोड़ तो विदेशी घुसपैठिये हमने ही तो अन्दर घुसाएँ हैं वोटों के लिए]

अच्छा! समझौते की गाड़ियों में दुश्मन भी आ जाते हैं???
क्या हुआ जो दिल लग गया यहाँ - और यहीं बस जाते हैं
बेचारे - ये तो वहां का गुस्सा है - जो यहाँ पर उतारते हैं
वहां पैदा होने के पश्चाताप में - यहाँ पर तुम्हें मारते हैं (क्यों न मारें?)

क्या सोचता है तू ? मरना था जिनको - वो तो गए मर
तू तो जिन्दा है ना - तो चल - अब मरने तक हमारे लिए काम कर
और क्या औकात थी उन मरने वालों की ? सिर्फ २०० रुपये मासिक कर (*१)
हम क्या शोक करें - क्यों शोक करें अब - ऐसे वैसों की मौत पर ?

अच्छा! आतंकवादी तुम्हें लूटता है? मारता है? मजहब के नाम पर ?
पर आतंकवादी का तो कोई मजहब ही नहीं होता - कुछ तो समझा कर (बेवकूफ कहीं के)
तू सहिष्णु है - भारत सहिष्णु है - यह भूल मत - निरंतर याद कर
क्या कहा? आत्मरक्षार्थ प्रतिरोध का अधिकार? - बंद यह बकवास कर (अबे,वोट बैंक लुटवायेगा क्या)

इन बेकार की बातों में - न अपना कीमती वक्त बरबाद कर
भूल जा - कुछ नहीं हुआ - जा काम पर जा - काम कर

तेरे गुस्से की तलवार को - हमारी शांति की म्यान में रख
हमने दे दिया है ना कड़ा बयान - ध्यान में रख
जानते हैं हम - इस बयान पर - वो ना देगा कान
चिंता ना कर - तैयार है - एक इस से भी कड़ा बयान

दे रक्खा है उसे - सबसे प्यारे देश का दरजा (*२)
चुकाना तो पड़ेगा ना - इस प्यार का करजा
दुनिया भर से - कर दी है शिकायत - कि वो मारता है
दुनिया को फुरसत मिले - तब तक तू यूँ ही मर जा

किस को पड़ी है कि - कौन मरा - और मार गया कौन
आराम से मर - तेरे लिए भी रख लेंगे - २ मिनट का मौन

*1 : Profession Tax Rs.200/-per month
*2 : Most Favoured Nation

रचयिता : धर्मेश शर्मा
संशोधन, संपादन : आनंद जी. शर्मा
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भारतीय की जान की कीमत
(बाल-बुद्धि भारतियों पर कवि का कटाक्ष)

अरे
- समझौता गाड़ी की मौतों पर - क्या आंसू बहाना था
उनको तो - पाकिस्तान नाम के जहन्नुम में ही - जाना था

मरने ही जा रहे थे - लाहौर, करांची - या पेशावर में मरते
और उनके मरने पर - ये नेता - हमारा पैसा तो ना खर्च करते

और तुम - भारतियों, टट्पुंजियों - कहते हो हैं हम हिंदुस्थानी

जब हिसाब किया - तो निकला तुम्हारा ख़ून - बिलकुल पानी
औकात की ना बात करो - दुनिया में तुम्हारी औकात है क्या - खाक
वो समझौता में मरे तो १० लाख - तुम मुंबई में मरो तो सिर्फ ५ लाख

तुम से तो वो अनपढ़, जाहिल, इंसानियत के दुश्मन, ही अच्छे

देखो कैसे बन बैठे हैं - बिके हुए सिक यू लायर मीडिया के प्यारे बच्चे
उनके वहां मिलिटरी है - इसलिए - यहाँ आ के वोट दे जाते हैं
डेमोक्रेसी के झूठे खेल में - तुम पर ऐसे भारी पड़ जाते हैं

जाग जा - अब तो जाग जा ऐ भारत - अब ऐसे क्यूँ सोता है

वो मार दें - और तू मर जाये - लगता ऐसा ये "समझौता" है
प्रियजनों की मौत पर - फूट फूट रोवोगे - वोट नहीं क्या अब भी दोगे
लानत है - ख़ून ना खौले जिस समाज का - वो सज़ा सदा ऐसी ही भोगे

पांच साल में - आधा घंटा तो - वोट के लिए निकाला कर

विदेशियों के वोटों से जीतने वालों का तो मुंह काला कर
सब चोर लगें - तो उसमे से - तू अपने चोर का साथ दे दे
अपना तो अपना ही होता है - परायों को तू मात दे दे

बुद्धिमान है तू - अब अपनी बुद्धि से काम लिया कर

वोट दे कर अपनों को - वन्दे मातरम का उद्घोष कर
आक्रमणकारियों के दलालों का राज - समूल समाप्त कर
ऐ भारत - तू उठ खड़ा हो - निद्रा, तन्द्रा को त्याग कर

अपने भारतीय होने पर - दृढ़ता से अभिमान कर
कुछ तो कर - कुछ तो कर - अरे अब तो कुछ कर

रचयिता : धर्मेश शर्मा
संशोधन, संपादन : आनंद जी. शर्मा
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बात चीत रहेगी जारी , बात चीत रहेगी जारी

चाहे हम हों कितने तगड़े , मुंह वो हमारा धूल में रगड़े,
पटक पटक के हमको मारे , फाड़ दिए हैं कपड़े सारे ,
माना की वो नीच बहुत है , माना वो है अत्याचारी ,
लेकिन - बात चीत रहेगी जारी , बात चीत रहेगी जारी .

जब भी उसके मन में आये , जबरन वो घर में घुस जाए ,
बहू बेटियों की इज्ज़त लूटे, बच्चों को भी मार के जाए ,
कोई न मौका उसने छोड़ा , चांस मिला तब लाज उतारी ,
लेकिन - बात चीत रहेगी जारी , बात चीत रहेगी जारी .

हम में से ही हैं कुछ पापी , जिनका लगता है वो बाप ,
आग लगाते हुए वे जल मरें , तो भी उसपर हमें ही पश्चाताप ?
दुश्मन का बुरा सोचा कैसे ??? हिम्मत कैसे हुई तुम्हारी ???
अब तो - बात चीत रहेगी जारी , बात चीत रहेगी जारी .

बम यहाँ पे फोड़ा , वहां पे फोड़ा , किसी जगह को नहीं है छोड़ा ,
मरे हजारों, अनाथ लाखों में , लेकिन गौरमेंट को लगता थोडा ,
मर मरा गए तो फर्क पड़ा क्या ? आखिर है ही क्या औकात तुम्हारी ???
इसलिए - बात चीत रहेगी जारी , बात चीत रहेगी जारी .

लानत है ऐसे सालों पर , जूते खाते रहते हैं दोनों गालों पर ,
कुछ देर बाद , कुछ देर बाद , रहे टालते बासठ सालों भर ,
गौरमेंट करती रहती है नाटक , जग में कोई नहीं हिमायत ,
पर कौन सुने ऐसे हाथी की , जो कोकरोच की करे शिकायत ???
इलाज पता बच्चे बच्चे को , पर बहुत बड़ी मजबूरी है सरकारी ,
इसीलिये - बात चीत रहेगी जारी , बात चीत रहेगी जारी .

वैसे हैं बहुत होशियार हम , कर भी रक्खी सेना तैयार है ,
सेना गयी मोर्चे पर तो - इन भ्रष्ट नेताओं का कौन चौकीदार है ???
बंदूकों की बना के सब्जी , बमों का डालना अचार है ,
मातम तो पब्लिक के घर है , पर गौरमेंट का डेली त्योंहार है
ऐसे में वो युद्ध छेड़ कर , क्यों उजाड़े खुद की दुकानदारी ???
इसीलिये - बात चीत रहेगी जारी , बात चीत रहेगी जारी .

सपूत हिंद के बहुत जियाले , जो घूरे उसकी आँख निकालें ,
राम कृष्ण के हम वंशज हैं , जिससे चाहें पानी भरवालें ,
जब तक धर्म के साथ रहे हम , राज किया विश्व पर हमने ,
कुछ पापी की बातों में आ कर , भूले स्वधर्म तो सब से हारे ,
जाग गए अब, हुए सावधान हम , ना चलने देंगे इनकी मक्कारी ,
पर तब तक - बात चीत रहेगी जारी , बात चीत रहेगी जारी .

रचयिता : धर्मेश शर्मा
मुंबई / दिनांक २०.०९.२००९
संशोधन, संपादन : आनंद जी. शर्मा

मुसलमानों -तुम उनकी गर्दने मारो और पोर -पोर पर चोट लगावो.





Thursday, March 25, 2010

चलो आलू खाते हैं.

चलो आलू खाते हैं. क्योंकि आलू मोटापा बढाता है इसलिए नहींक्योंकि आलू मैं कैलोरी ज्यादा होती है इसलिए नहीं बल्कि इसलिए की आलू इस बार भारत मैं कुछ ज्यादा ही मात्रा मैं पैदा हो गया हैआप जिस आलू को रूपया किलो में खरीदते हैं उस आलू की कीमत किसान को मात्र ४० पैसा प्रति किलो मिलती हैऔर तो और आलू की पैदावार भारत में इतनी ज्यादा हो गई है की भारत में रखने की जगह ही नहीं बची हैअब नुकसान तो बेचारे किसान का हो गया नाजिस आलू को पैदा करने में उसे रूपया प्रति किलो खर्च करना पड़ा और उसकी कीमत के बदले उसको रूपया ६० पैसा नुकसान उठाना पड़ रहा है, इसलिए में कह रहा हूँ की चलो आलू खाते हैआलू को आप सब्जी के अलावा पराठा के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते है , आलू को आप चिप्स के रूप में भी इस्तेमाल कर के खा सकते हैं और तो और आलू का आप हलवा भी बना सकते हैआलू खा करके आप सैकड़ो किसानो को कर्ज से मुक्ति दिला सकते है और आप आलू खा करके आप सैकड़ो किसानो को मरने से बचा सकते हैं इसलिए मैं कह रहा हूँ की सब मिल करके आलू खाएं

Sunday, March 21, 2010

मैं खुद अपने आप को हिन्दू कहता मानता और लिखता हूं ।

मैं खुद अपने आप को हिन्दू कहता मानता और लिखता हूं । सीता जी को माता और श्री रामचन्द्र जी को मर्यादा पुरूषोत्तम मानता हूं । मैं तो इस बात की भी परवाह नहीं करता कि लोग उन्हें काल्पनिक और मिथकीय पात्र मानते हैं ।

श्रीमान डॉ अनवर जमाल

मतलब ये की श्रीमान अनवर आप इस बात को मानते हैं की सीता माता और भगवन राम काल्पनिक हैं। लेकिन कभी -कभी मुझे ये लगता है की कंही आप खुद काल्पनिक तो नहीं हैं। कभी ये मत कह दीजियेगा की कुरान और मोहम्मद साहेब भी काल्पनिक पात्र हैं।

आप से अनुरोध है की आप अपना कीमती समय देश की सेवा मैं लगाये, अपने लोगो की भलाई मैं लगाये। हमारा भारत देश पहले ही आतंकवाद, गरीबी , और न जाने कितनी तरह की बेमानी बीमारियों से घिरा है ।

और आप से ये भी विनम्र निवेदन है की आप धर्म ग्रंधो का सही तरीके अध्यन किया करे , क्योंकि आधी अधूरी जानकारी खरनाक साबित होती है। अपनी राय रखना एक अलग बात होती है और अपना फैसला बताना अलग होता है। देश के मुल्लावो ने पहले ही अनपढ़ लोगो के दिमाग मैं न जाने कितनी ग़लतफ़हमी डाल राखी है, आप तो पढ़े लिखे हैं।