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Sunday, October 25, 2009

मुंबई-ठाकरे और छट पूजा

ठाकरे परिवार को मुंबई और मुंबई (महारास्ट्रको लोगो ने मिल कर ठग लिया, आखिर महारास्ट्र के लोगो ने दिखा दिया की सिर्फ़ मराठी मानुस का नारा लगाने से कम नही चलने वाला पुरा का पुरा महारास्ट्र बोलना जरुरी है। महारास्ट्र मैं कांग्रेस की जीत में सबसे बड़ा योगदान उत्तरभारतीय लोगो का है, इस जीत से ठाकरे परिवार को ये समझ जाना चाहिए की अगर राजनीती करनी है तो सब को साथ लेकर के चलना जरुरी हैं , अकेले चना भाड़ नही फोड़ता है , महारास्ट्र में अगर सरकार बनानी है तो उत्तरभारतीय लोगो को अपने साथ ले कर चलना ही पड़ेगा।
उत्तरभारतीय लोगो की जन्शंख्या का अनुमान तो छठ पूजा की फीड को देखर के मिल ही गया होगा,
बल्कि मैं तो ठाकरे परिवार को अभी से अगले साल होने वाली छट पूजा मैं शामिल होने का निमंत्रण दे रहा हूँ, आ जाइएगा , इस बार न सही अगला बिधान सभा का चुनाव तो आपको जितवा ही देंगे।

Saturday, October 24, 2009

कैसे कमा लेते हैं,

लोग हैं की कमा कमा के थक जा रहे हैं, और हम हैं की कमाने के चक्कर मैं ही थक जा रहे हैं, आखिर थके भी क्यों नही कमाने जो आए हैं । कमाई तो देखिये, कमाई है चाहे वो धन -दौलत हो या रुपया पैसा या इज्जत या मान - सम्मान। सब मेहनत से ही मिलता है, लेकिन आखिर किंतनी मेहनत करनी पड़ेगी । लोग इतना ज्यादा पैसा -रुपया कैसे कमा लेते हैं,

एक बात ये भी देखने में आती है की जो लोग ज्यादा मेहनत करते हैं वो लोग कम पैसा कमाते है और जो लोग कम मेहनत करते हैं वो लोग ज्यादा पैसा-रुपया कमाते है। आखिर लोग क्यों ? लेकिन ये बात भी पुरी तरह से सही नही है क्योंकि जो लोग बुलंदियों पर पहुँच गए हैं उन लोगो से पूछे तो सचमुच लगता है की उन लोगो ने भी अपने -अपने ज़माने मैं हमसे कहीं बहुत ज्यादा मेहनत की तब आज जा कर के वो लोग मजे ले रहे हैं,

लेकिन ये बात भी सही है की हम ख़ुद भी तो अपने समझ से पुरी तरह से लगे रहते हैं, सुबह से दोपहर और दोपहर से शाम लेट घर पहुचना मगर नतीजा वही रोज वाला -सोरी बॉस।

Monday, October 12, 2009

शीला जी अब और ज्यादा - जरा बच के मेरे यारो

दिल्ली की सरकार ने अपनी कमाई कम होते देख एक और नया जुरमाना लगाने को तैयार हो गई है, जरा बच कर के मेरे यारो, शीला जी भी रोज कुछ न कुछ नया -नया आइडिया निकलती रहती हैं, अपना और अपने लोगो का पेट पालने के लिए, आखिर करें भी क्यों नही, दिल्ली मैं महंगाई जो जमीन से आसमानपर भागी जा रही है,
अब दिल्ली पुलिश के जवान भी मोटा कमाएंगे , आखिर बहुत दिन बाद मौका जो मिला है, कुछ साल पहले ट्रैफिक पुलिश कम से कम ६०० रूपये का चालान काट ती थी तो लोग १०० या २०० दे कर के पीछा छुडा लेते थे , मगर अब तो पुरी जेब खाली करनी पड़ेगी या तो किसी यार दोस्त को फ़ोन कर के बुलाना पड़ेगा चालान भरने के लिए क्योंकि अब १०० या २०० से कम नही चलेगा। क्योंकि अब खुले आम शराब पीने पर ५०००० हजार रूपये का जुरमाना जो लगने वाला है,
ये बेचारे पीने वाले जायेंगे किधर

Tuesday, October 6, 2009

करवा चौथ बनाम मेरी बीबी और मैं

बात ३ अक्तूबर की है, घर पहुचने में ज्यादा नही बस रात के १० बज गए थे , हुआ ये की शनिवार को ऑफिस की छुट्टी थी , तो दोस्तों के साथ शाम को खाने पीने का प्रोग्राम बन गया, और बस उधर से में लेट हो गया । जैसे ही मैंने गाड़ी घर के बाहर खड़ी किया , तो सामने देखा तो मैडम दरवाजा पकड़ के खड़ी हैं। चेहरा तो पहचान में आ ही चुका था की बेटा बस आज तो कहानी ख़राब है तेरी। एक कदम ही अन्दर बढाया था की लंबा चौडा भाषण चालू हो गया। मरता क्या न करता एक कान से सुनकर दुसरे कान से निकालता हुआ, फौरन कपड़े बदले और घुस गया बाथरूम में। जैसे ही बाथरूम से बाहर निकला जोर से आवाज आई खाना, खाना है या नही। तब तक तो मैं भी जोश में आ गया था, मैंने भी उसी आवाज को बरक़रार रखते हुए कहा की खाना - खाना हो गा तो ख़ुद ले लूँगा। उस रात की रोटी तो ख़ुद बना कर के खा ली। सोचा की अगले दिन समझौता हो जाएगा और बिना टेंशन लिए या दिए सो गए । सुबह उठते ही मैडम का मिजाज गरम ऑफिस जाते समय भी गरम । सोचा की चलो शाम होते -होते सब ठीक हो जाएगा । और बस तब से ये ही सिलसिला चल रहा है, सुबह से शाम और शाम से सुबह। अब तो मैंने भी ठान लिया है की जब तक मेरी बीबी मुझसे बात नही करेगी तब तक मैं भी उस से बात नही करूँगा, देखते हैं की कब तक चलती है नाराजगी इस तरह से,
लेकिन एक बात तो है अगर बीबी नाराज हो तो आदमी का खर्च कम हो जाता है, क्योंकि जब बीबी बात ही नही करेगी तो पैसे कैसे मांगेगी।
लेकिन नुकसान भी बहुत होते, हमेशा टेंशन बनी रहती है और टेंशन के साथ साथ और भी बहुत कुछ नुकसान होता है।