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Thursday, July 16, 2009

नारी तेरे कितने रूप

नारी के कितने रूप होते हें ये तो कोई नई बात है नही, बताने के लिए, लेकिन रीता बहुगुणा जी तो सचमुच ही महान नारियों में से एक अनोखी नारी हें, उनका तो जबाब ही नही है। मायावती के राज्य में रहते हुए मायावती के ही बलात्कार की बातें वाह ! जी वाह ! कमल है। रीता जी अपने बच्चो को क्या शिच्छा देंगी और कैसे ये पुरे राज्य या देश का नेत्रित्व करेंगी। क्या चुनाव आयोग बहरा हो गया है, क्या भारत की संसद या भारत का संविधान गाली देने की परम्परा को रोकने के कोशिश नही करता, या गाली देने के बाद माफ़ी मांग लेने से कम चल जाता है,

एक बहुत शक्त कानून को जरूर हें एसे नेतावों के लिए

सरदार जी दारू सस्ती कर दो

सरदार जी दारू सस्ती कर दो,
सरदार जी बड़ी मेहरबानी होगी अगर आप दारू को सस्ती कर देंगे तो, कम से कम लोग अच्छी दारू तो खरीद कर के पी सकेंगे। और दारू तो आज के ज़माने में लोग बिल्कुल चाय की तरह से इस्तेमाल करते हैं। इससे तो सरकार की आमदनी और बढेगी और सबसे बडी बात की कोई और मुख्यमंत्री नरेंदर मोदी की तरह से फसेंगा भी नही।
मेरे समझ से दारू की कीमत इतनी कम हो जानी चाहिए की शराब माफियाओं को मौका ही न मिले की वो मिलावटी शराब बेच सकें। आज बढती हुई दारू की कीमत से लोग इतना ज्यादा परेशान हैं की लोग सस्ती दारू पीने चक्कर में अपनी जान तक दावं पर लगा देता हैं। दारू पीने वाले को दारू चाहिए चाहे क्वालिटी कुछ भी हो शराब का शरूर आना चाहिए, और इस शरूर के चक्कर में घर वाले बर्बाद हो जाते हैं।
शराब चाहे जितनी भी मंहगी हो जाए पीने वाले तो पियेंगे ही और क्योँ न पिए, शराब कोई नई चीज तो है नही जो लोग उस से डरे, शराब तो सदियों से मानव सभ्यता का हिस्सा रही है, देवता इन्द्र अपने दरबार में शराब पीने के बाद शबाब का आनंद लेते थे तो लोग शराब के साथ कबाब का आनंद लेते हैं तो क्या गुनाह है।
बस अगर शराब की कीमत कम हो जाए तो कम से कम लोग अच्छी शराब कम दम पर खरीद कर के पियेंगे और इस से उनकी जेब पर भी बोझ नही पड़ेगा और ना ही नकली शराब के चक्कर में लोग अपनी जान देंगे.

Wednesday, July 8, 2009

आते ही चली जाती हो तुम -क्यों ?

आते ही चली जाती हो तुम -क्यों ?

आते ही तुम जाने की बातें करने लगती हो तुम, आखिर मैंने ऐसा क्या गुनाह कर दिया है तुम्हारे साथ । कभी तो बोला करो कुछ । तुम्हे तो अच्छी तरह से पता है की तुम जब आती हो मेरे घर में तो सब कितना खुश हो जाते हैं , चारो तरफ़ खुसी की लहर दौड़ जाती है, मेरे पड़ोसी भी कितने खुश हो जाते हैं की चलो दुबारा आई तो सही।

मेरे चहरे पर रौनक आ जाती है तुम्हे देख कर, मेरे घर का कोना कोना खिल उठता है, तुम्हारी आहट सुनकर। कितना आनंद आता है उस समय ये तो बस मुझे या मेरे बच्चो को पता है।

लेकिन तुम हो की रूकती ही नही, ना तो तुम्हारे आने का समय और ना ही तुम्हारे जाने का समय , तुम्हे क्या पता की तुम्हारे जाने के बाद मेरे बच्चे पुरी रात सो नही पाते और बच्चे ही क्यों में भी तो नही सो पता और सो भी कैसे जायें । तुम जो नही होती। मेरी बीबी भी पुरी रात जग करके तुम्हारा इंतजार करती रहती है की तुम कब आओगी और हम सब कब अपना कूलर और पंखा चला कर के सोयें। और रात ही क्या दिन में भी तो तुम्हारी पुरी जरुरत होती है। तुम्हारे बिना तो ठंडा पानी भी नही मिलता पीने को।

कृपया मेरे पुरे परिवार पर तरस खावो तुम और अगर २४ घंटा नही रह सकती तो कम से कम १५-२० घंटा तो रुको, लेकिन तुम हो की ८-१० घंटे में ही निकल लेती हो। तुम्हारे घर अगर जा करके पता करे तो कोई भी आदमी सही जबाब नही देता । तुम्हारे घर वालो के पास तो रता - रटाया बहाना होता की आज फलां मोहल्ले में तार टूट गई है या फलां मोहल्ले का ट्रांस्फोर्मेर ख़राब हो गया है।

हे बिजुली रानी कृपया मेरे ऊपर तरस खाएं और मेरे घर आयें तो कुछ समय मेरे बच्चो के साथ जरुर बिताएं।

Sunday, July 5, 2009

मेरी मां

सचमुच मेरी मां महान है जिसने मुझे जनम दिया, आज मैं जो भी हूँ उसी मां की वजह से हूँ, मैं अपनी मां को कैसे धन्यवाद् बोलू मुझे नही पता और न ही मेरी मां मुझसे धन्यवाद् की उम्मीद करती हैं कयोंकि वो मेरी मां हैं ।
मां के कई रूप होते हैं वो बहन के रूप में या भाभी के रूप में या बीबी के रूप में वो कंही न कंही माँ के रूप मैं ही मिलेगी, चाहे वो मेरी बुआ के रूप में हो या मेरी मौसी के रूप में । नारी मतलब मां और उसकी इज्जत करना एक बेटे का फ़र्ज।

लेकिन आज मेरे समाज को ये क्या हो गया है जो मेरी मां को ख़त्म करने पर ही तुला है , आखिर क्या बात है की आज केरल और पोंडिचेरी जैसे छोटे छोटे राज्यों में लड़कियौं की स्थिथि ठीक है और बाकि स्टेट में ख़राब खास करके हरियाणा, दिल्ली और पंजाब में जबकि इन राज्यों में लोगो की आर्थिक स्थिथि बहुत ही आच्छी है

Saturday, July 4, 2009

राष्ट्रपति पुरस्कार का एक और हक़दार

पिछले दिनों चित्रकूट मैं पुलिश और डाकू घनश्याम के बीच पुरे तीन दिनों तक घमाशान गोलीबारी होती रही नतीजा कुछ पुलिश ऑफिसर के साथ कुछ जवान भी मारे गए, डाकू घनश्याम तो मारा गया लेकिन पीछे -पीछे कई लोगो को शहीद भी कर गया । तब उत्तर प्रदेश पुलिस को लगा की ये थी असली मुडभेड लेकिन जो देहरादून में हुआ वो उत्तराखंड पुलिस के लिए डूब कर मर जाने जैसा है, एक लड़का जो की ऍम बी ये करने के बाद देहरादून जाता है नौकरी खोजने के लिए उसको पुलिस जंगल में ले जाकर ६ की ६ गोलियां उसके सीने में उतार देती है और बाद में ये सफाई देती है की उसने पुलिस पर गोलियां चलाई, बेचारी पुलिस और करे क्या तरक्की पाने के लिए तो कुछ ना कुछ तो करना ही था सो कर डाला। कर दिया एक और घर को सुनसान ।

क्या ऐसे पुलिस ऑफिसर के लिए कोई कानून नही है जो इनको सबक सिखा सके की फर्जी एन्कोउन्टर के बाद क्या होता है।