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Sunday, August 13, 2017

अब मच्छर ही नहीं राजनेता भी खून चूसते हैं.



जापानी बुखार (एन्सेफलीटीस) मूलतः पूर्वी उत्तरप्रदेश और पश्चिम बिहार में अपना प्रकोप दिखता है वो भी खाश करके 6 महीने से लेकर 15 साल तक के बच्चों के ऊपर / मानसून के समय जापानी बुखार के जिम्मेदार मच्छर बहुत ही ज्यादा मात्रा में पैदा होते हैं और छोटे बच्चो को अपना शिकार बनाते हैं.
बच्चो को मच्छरों से बचाये ; क्योंकि अब मच्छर ही नहीं राजनेता भी खून चूसते हैं.
 1978 से  आजतक लगभग 50000  लोगो की जान अब तक इस भयंकर बीमारी से जा चुकी है, लेकिन इस इसका मतलब ये  नहीं हुआ की ये आम बात है और इस पर ध्यान देने की जरुरत भी नहीं. हर रोज हमारा देश नई नई  बुलंदियों को छू रहा है, मगर गरीबो के लिए अपवाद है, राजनेता चाहे किसी पार्टी के हो सत्ता से बाहर  जब तक रहते हैं तब तक तो ईमानदार और कर्तव्यपरायण बने रहते हैं, सत्ता मिलते मिलते ही सब भूल जाते हैं. 
आज जितनी बयानबाजी  सत्ता पक्ष और विपक्ष की तरफ से की जा रही है, दुखद है बयानबाजी की बजाय ये ध्यान दिया जाय की अब कोई नया मरीज नहीं बनेगा , उसका इलाज खोजा जाये. 


राजनेता लोगो के हिसाब से गरीब जनता सिर्फ वोट देने और मरने के लिए पैदा होते हैं, खून चाहे मच्छर चूसे या राजनेता उस से कोई फर्क नहीं पड़ता।  मंदिर मैं जा कर दान पुण्य करके अपने पापो से मुक्ति  पाने से तो अच्छा है की पूर्वी उत्तरप्रदेश और पश्चिमी बिहार की गरीब जनता को मच्छरदानी दान की जाय , जिस से उनके बच्चे बीमार ना हो। 









Saturday, March 25, 2017

विरोध का आलम तो देखिये:-अवैध बूचड़खाना

विरोध का आलम तो देखिये ,अभी  सफ्ताह भी नहीं हुआ योगी सरकार बने हुए।  पुलिस में कुछ भ्रस्ट लोग सस्पेंड हो गए तो विरोध, अगर सरकार ये कदम नहीं उठती तो भी विरोध करते की योगी सरकार ने भ्रस्टाचार के लिए अभी तक कोई कदम नहीं उठाया. 

लड़कियों  और महिलाओ के साथ हो रही छेड़खानी को रोकने  के लिए उठाये गए कदम पे कुछ रोमियों टाइप के लोग तंज कसने लगे हैं. 

बूचड़खाने का विरोध तो चरम पर है, टुंडा पूरी दुनिया में फेमस हो गया और वो भी मुफ्त में , लोग ये भूल गए की टुंडे जैसे लोग और भी हैं उत्तर प्रदेश में , जो कबाब बेच कर अपना परिवार पालते हैं. 

पूर्व वर्ती सरकारे  भी समय समय पर अवैध कामो को बंद करने के लिए कोशिश करती रहती है, जैसे अवैध खनन , अवैध तरीके से पेड़ो की कटाई , अवैध शराबे , अवैध खाने पीने की दुकाने , रेहड़ी पटरी वालो को समय समय पर रेहड़ी पटरी लगाने से रोकना।  और तब भी लोग बेरोजगार होते हैं. 

मगर अवैध बूचड़खाना सिर्फ एक वर्ग विशेष से सम्बन्ध रखता है, और यहीं वजह है की कुछ लोग अवैध बूचड़खाने का सपोर्ट करने लगे हैं, क्योंकि उनको आज भी अपने पुराने वोट बैंक से कुछ उम्मीद बची है. 

Friday, March 24, 2017

काम की बातें: प्रधान मंत्री आवास योजना : NOTIFICATION ISSUED

काम की बातें: प्रधान मंत्री आवास योजना : NOTIFICATION ISSUED

प्रधान मंत्री आवास योजना : NOTIFICATION ISSUED

PMAY NOTIFICATION ISSUED: TWO MORE CATEGORIES OF MIG-1 & MIG-2 ADDED IN ADDITION TO MODIFICATION OF SUBSIDY TENURE TO 20 YEARS (FROM 15 YEARS) IN EXISTING PMAY- EWS SCHEME:

Three Categories in PRIME MINISTER AWAS YOJNA:
1. EWS: Income :upto ₹6 Lac : Subsidy @ 6.5℅ on first 6 lacs loan for first 15 years.
2. MIG-1 : Income upto ₹12 lacs : Subsidy @4℅ for first 9 lacs loan for first 20 years.
3. MIG-2 : Income upto ₹ 18 lacs : Subsidy @ 3℅ for first 12 lacs loan for 20 years.


NOTE:
a) Income is Annual House hold income, comprising of Husband, wife, & unmarried dependent children. If son/ daughter are employed/having independent  self  income, can be treated as separate household (family).
b) Household should not have any Pucca House. Means first time home buyers are eligible.
c) Area limit : 
     * EWS : NO Limit
     * MIG-1 : 90 Sq MTR
     * MIG-2 : 110 Sq MTR
d) MIG-1 & MIG-2 Categories are effective from 01.01.2017.
e) Applicant (s) should be resident of & purchasing House/ flat in any one of  4041 URBAN TOWNs (notified)/ Cities in the country.
f) loan can be for purchase of house/ flat or for Construction on already owned plot.
g) Only new loan & no Bank Transfer (BT) / Takeover from one bank to other are eligible.
h) Only Term Loan eligible & no Overdraft loan eligible.
i) Subsidy is claimed by loanee Bank / Housing Finance Co from National Housing Bank (NHB), provided customer submit affidavit / declaration to Bank that :
* The Applicant does not own any Pucca House in the country.
* Applicant (s) household annual income is less than ₹6 lacs/ 12 lacs/ 18 lacs
* Fulfilled KYC  of Applicant (s) with Aadhar for each member in the household family.
* Female in the household must be applicant/ co-applicant & must have name in property. Unmarried man with no spouse/ female in household are also eligible subject to declaration that there is no adult female in the household.

Saturday, October 15, 2016

भारत के नेता और भारत का भविषय।

चापलूसी करना न तो हर किसी के बस की है और न तो हर कोई फायदा उठा पाता है।

देश को आजाद हुए लगभग  70 सालों में अगर किसी चापलूस परिवार को फायदा मिला है तो वो है नेहरू खानदान (आज  का गांधी परिवार ) .

आजादी से पहले हंसते -हंसते फांसी पे लटकने वाले हों या बम फोड़ने वाले , उन सबके अलावा भी लाखो की संख्या में स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी थे। मगर बस पेनशन तक सिमित रह गये।

गांधी (उपनाम ) खानदान दुनिया के दस अमीरों में शामिल हो चुका है।

लगभग 70 साल की आजादी में लगभग 60 साल तक देश पर राज्य करने वाली पार्टी आज तक न तो गरीबी दूर कर पायी न हि किसानों का करजा  माफ करवा पायी, न ही दलितों को उनका अधिकार दिलवा पायी और तो और अपने आप को पंडित कहने वाले सवर्णों का भी भला नही कर पायी।

वोट की राजनीति ऐसी चली की एक दो दलों को छोड सारे दलित -मुस्लिम बनाम देश की राजनीति  में लग गये।

मतलब कि सिर्फ अपने फायदे कि लिए लगभग कुछ दलों के मुखिया लोगों ने देश पिछड़ जाने पे मजबूर कर दिया।

वामपंथी विचारधारा के लोग चीन के विचार अपना सकते हैं मगर घर के पूर्वजों को नकारने से परहेज नही कर सकते।

हालात इतने खराब हो सकते हैं ये तो आज से लगभग दो साल पहले किसी को नही पता था कि केजरीवाल जैसे लोग महिलाओं के शोषण का अधिकार अपने पास रखते हैं ।

चारा चोर हो या रेल मन्त्री रहते हुए ममता और पासवान जी की मनमानी सब के सब अपने भले के लिये रहे।

मैं खुद सदैव भाजपा का समर्थक रहा हूं , मगर इन्दिरा गांधी को अपना आदर्श मानता हूं , सच में  वो दुर्गा थी , उनके जैसा प्रधानमन्त्री न तो कोई था और न कोई हो पायेगा । इन्दिरा जी की हिम्मत थी जो बांग्ला देश को आजादी दिलवाई और खालिस्तान समर्थकों को मिट्टी में मिलाया , खूद  की जान की बिना परवाह किये।

आज उम्मीद है देश को मोदी जी से लेकिन इन्दिरा के समय इतने विरोधी नही थे जितने आज हैं।

आज के विरोधी इन्दिरा जी के ही वंशज है ये कहने में मुझे कोई गुरेज़ नही है।

Saturday, October 31, 2015

विचारो में असमानता

अक्सर ये देखा जाता  है की मानव समाज में  भिन्न - भिन्न विचारो के लोग पाये जाते हैं, इसकी मूल वजह तो मुझे नहीं पता , मगर विचारो में एकता लाने के लिए समय - समय पे धार्मिक एवं सामाजिक  परम्पराओ का जन्म होता रहा है, और ऐसा हुआ भी है की एक पंथ, एक समाज  या एक धर्म के मानने वालो में कुछ हद तक विचारधारा समान होती है , सिर्फ कुछ हद तक ही।  

अलग -अलग धार्मिक , राजनितिक एवं सामाजिक संस्थाओ की अपनी अलग - अलग विचार धारा होती है,  अलग -अलग धार्मिक , राजनितिक और सामाजिक संस्थाओ से जुड़े हुए लोग काफी हद तक उसका अनुसरण भी करते है, लेकिन उसके बावजूद कभी -कभी ऐसा होता है की उनके बीच भी वैचारिक मतभेद पैदा हो ही जाते हैं, और आपस में दूरियां बढ़ने लगती हैं।  

हद तो तब हो जाती है , जब दो अलग -अलग विचारधारा वाले धार्मिक , सामाजिक या राजनितिक समूहों का आपस में टकराव होता है।  और टकराव का नतीजा भयानक होता है।  

अपने - अपने विचारो को धार्मिक, राजनितिक और सामाजिक समूहों द्वारा अपने समर्थको के दिलो -दिमाग में  भर दिया जाता है, और उसका परिणाम ये होता है की दुसरो राजनितिक , धार्मिक या सामाजिक समूह का विचार पहले वालो को व्याहारिक नहीं लगता , बल्कि पहले वाला समहू ये चाहने लगता है की दूसरा समहू भी उनके विचारो का अनुसरण करे।  

एक परिवार में माँ - बाप के विचार अलग -अलग हो जाते हैं, भाई-बहन के विचार अलग हो जाते , मतलब की एक संयुक्त रूप से हरा -भरा परिवार भी आपसी विचारो के मतभेद में उलझा रहता है, लेकिन चूँकि वो एक संयुक्त परिवार है, इसीलिए विचारो के मतभेद के बावजूद आपस में प्यार बना रहता है, पड़ोसियों के सामने एकजुट होने में विलम्ब भी नहीं होता। 

जँहा कभी भी धर्म , समाज या राजनीती एक -दूसरे के सामने आई है, वंहा अक्सर आपस में टकराव भी हुए हैं , 

रामायण और  महाभारत का समय  , सिकंदर से लेकर समार्ट अशोक का विश्व विजय अभियान रोम साम्राज्य का अंत , जैन , बौध,  ईसाई, इस्लाम, सिख धर्म का आगमन , प्रथम विष्व युध हो या द्वतीय विश्व युध का भयानक परिणाम, विचारो में असमानता का ही परिणाम है। 

आज हमारे हिंदुस्तान में  भी इसी तरह की विचार धारा का भरपूर फायदा राजनितिक दल उठाने में व्यस्त हैं। 







Sunday, August 2, 2015

एक दिन ऐसा भी हो

आज फ्रेंडशिप दिवस है , पूरा का पूरा सोशल मिडिया आज के दिन फ्रेंडशिप दिवस मना रहा है ,

ठीक इसी  तरह से इंसानी दिवस भी होना चाहिए , और उस दिन एक इंसान दूसरे इंसान को बधाई देता फिरे।

जन्हा न तो शिया - सुन्नी हो न ही हिन्दू - मुस्लमान , न कोई नीच जाती वाला हो और न ही कोई ऊँची जाती का।